तुलसी विवाह



भारत में तुलसी विवाह की पुरानी परम्परा रही हैl तुलसी विवाह हिन्दू धर्म के अनुयायीयों द्वारा किया जाने वाला एक औपचारिक विवाह कार्यक्रम है जिसमें तुलसी नामक पौधे का विवाह शालीग्राम अथवा विष्णु अथवा उनके अवतार कृष्ण के साथ किया जाता है। हिन्दू धर्म में इसे मानसून का अन्त और विवाह के लिये उपयुक्त समय के रूप में माना जाता हैl
तुलसी विवाह की कथा
तुलसी विवाह की मान्यता और इसके पीछे की कथा बहुत महत्वपूर्ण हैl प्राचीन काल में जलंधर नामक राक्षस ने चारों तरफ़ बड़ा उत्पात मचा रखा था। वह बड़ा वीर तथा पराक्रमी था। उसकी वीरता का रहस्य था, उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म। उसी के प्रभाव से वह विजयी बना हुआ था। जलंधर के उपद्रवों से परेशान देवगण भगवान विष्णु के पास गए तथा रक्षा की गुहार लगाई।
उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग करने का निश्चय किया। उन्होंने जलंधर का रूप धर कर छल से वृंदा का स्पर्श किया। वृंदा का पति जलंधर, देवताओं से पराक्रम से युद्ध कर रहा था लेकिन  वृंदा का सतीत्व नष्ट होते ही मारा गया। जैसे ही वृंदा का सतीत्व भंग हुआ, जलंधर का सिर उसके आंगन में आ गिरा। जब वृंदा ने यह देखा तो क्रोधित होकर जानना चाहा कि फिर जिसे उसने स्पर्श किया वह कौन है। सामने साक्षात विष्णु जी खड़े थे। उसने भगवान विष्णु को यह शाप दिया कि तुमने मेरा सतीत्व भंग किया है। अत: तुम पत्थर के बनोगे। यह पत्थर शालिग्राम कहलाया। विष्णु ने कहा, 'हे वृंदा! मैं तुम्हारे सतीत्व का आदर करता हूं लेकिन तुम तुलसी बनकर सदा मेरे साथ रहोगी। जो मनुष्य कार्तिक एकादशी के दिन तुम्हारे साथ मेरा विवाह करेगा, उसकी हर मनोकामना पूरी होगी।' बिना तुलसी दल के शालिग्राम या विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। शालिग्राम और तुलसी का विवाह भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का ही प्रतीकात्मक विवाह माना जाता है। 

तुलसी विवाह की पूजा विधि 
– तुलसी विवाह करते समय तुलसी का पौधा खुले में रखें।
– तुलसी विवाह के लिए मंडप को गन्ने से सजाएं।
– इसके बाद तुलसी जी पर सबसे पहले लाल चुनरी ओढ़ाएं। उन्हें श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
– इसके बाद तुलसी के गले पर भगवान विष्णु के दूसरे स्वरूप यानी शालिग्राम को रखें फिर उस पर तिल चढ़ाएं।
– अब दूध और हल्दी तुलसी जी और शालिग्राम भगवान को अर्पित करें।
– तुलसी विवाह के समय मंगलाष्टक का पाठ जरूर करें।
– एक घी का दीपक तुलसी जी के समक्ष जलाएं और उन्हें भोग में दाल और गुड़ अर्पित करें।
– तुलसी की कथा पढ़ें और भजन कीर्तन करें।
– एक लाल कपड़े में लपेट कर नारियल तुलसी माता को अर्पित करें।
– घर में किसी पुरुष को शालिग्राम जी को हाथ में उठाकर तुलसी जी की सात बार परिक्रमा करवानी चाहिए।
– ध्यान रहे कि तुलसी जी को शालिग्राम भगवान के बाईं तरफ बिठाएं।
– पूजा खत्‍म होने के बाद सारी सामग्री और तुलसी का पौधा मंदिर में दे आएं।


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